प्रेस विज्ञप्ति: बंजारों के अधिकारों पर जन सुनवाई 18 अक्टूबर 2016

प्रेस विज्ञप्ति

बंजारा बचेगा तो बैल बचेगा – निखिल डे

ये लड़ाई केवल बंजारों की नहीं पूरे देश की लड़ाई-पॉल दिवाकर

गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी बर्दास्त नहीं- भंवर मेघवंशी

राजसमन्द, 18 अक्टूबर, 2016

बैल बेचना बंजारों का अधिकार, हमारा संघर्ष, हमारा अधिकार के नारों के बीच आज बंजारा समुदाय के एक हजार से ज्यादा लोगों ने बालकृष्ण स्टेडियम से पुरानी  कलक्टरी तक अपने बैल बेचने के अधिकार और उन्हें गौरक्षा के नाम पर बेवजह परेशान किये जाने के विरोध में रैली निकाली जिसमें उन्होंने गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी और चौथवसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सरकार से मांग की.

बैल बेचना बंजारों का परंपरागत व्यवसाय है, देश में बंजारे सदियों से बैलों का व्यापर करते आ रहे हैं और पशुपालन विभाग द्वारा लगाये जाने वाले विभिन्न मेलों से ही बैल खरीदते हैं और इन्हें जहाँ पर खेती होती है उन इलाकों में मुख्यतः दक्षिण व मध्य राजस्थान में बेचते रहे हैं. बंजारा ही वह समुदाय है जो वास्तव बैलों को बचा रहा है और आज भी उसमें जी जान से जुटा हुआ है.

बंजारा समुदाय को फर्जी गौरक्षकों द्वारा परेशान किये जाने और आये दिन बेवजह तंग किये जाने, मारपीट किये जाने को लेकर हुई जन सुनवाई में देश के विभिन्न भागों के लोगों ने हिस्सा लिया और बंजारों की लड़ाई को पूरे देश के लोगों ने समर्थन दिया और इसे हर स्तर पर आगे ले जाने की बात कही. जन सुनवाई की शुरुआत पारशराम बंजारा ने की और उन्होंने बंजारों के इतिहास पर प्रकाश डाला साथ ही किस प्रकार से पिछले सालों में बंजारों पर अत्याचार बढे हैं उसके बारे में भी बात राखी.

जन सुनवाई में प्रसिद्द सामाजिक कार्यकर्त्ता निखिल डे ने कहा :कि देश में वास्तव में कोई बैलों को बचा रहा है तो वे बंजारे ही हैं क्योंकि वे सदियों से इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, उन्होंने कहा की बंजारे बचेंगे तो बैल बचेगा. उन्होंने कहा कि बंजारों ने आज राजसमन्द में रैली निकालकर इतिहास रचा है क्योंकि बंजारा समुदाय बड़ी संख्या में एकत्रित होकर पहली बार सड़क उतरा है.

जन सुनवाई में राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार संगठन के संयोजक पॉल दिवाकर ने कहा कि ‘ये लड़ाई केवल बंजारों की लड़ाई नहीं है ये पूरे देश की लड़ाई है, देश में विभिन्न संघर्षरत लोगों को इस लड़ाई से ताकत मिलती है.’

जन सुनवाई में सामाजिक कार्यकर्त्ता एवं मानवाधिकार संगठन पीयूंसीएल के राज्य उपाध्यक्ष भंवर मेघवंशी ने कहा कि गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी बर्दास्त नहीं की जाएगी, बंजारों की ये आवाज राजसमन्द से पूरे देश में जाएगी. उन्होंने कहा कि बंजारे कितने ही हिन्दू होने के प्रमाण दें लेकिन हिंदूवादी संगठन इन्हें मानेगा नहीं” इसलिए कोई सबूत देने की आवश्यकता नहीं है.

जन सुनवाई में पशुपालन विभाग के बरिष्ठ पशुपालन अधिकारी डॉ.जगदीश जीनगर भी आये और उन्होंने कहा कि बंजारे नियमों का पालन करें विभाग पूरी तरह बंजारों के साथ है.

शिक्षा, आवास और रोजगार के अवसर नहीं: राज्य के विभिन्न भागों से आये बंजारा समुदाय के लोगों ने कहा कि बंजारा समुदाय शुरुआत से ही बहुत मेहनती रहा है इन्होने बैल का व्यापार करते थे क्योंकि उस समय खेती में बैलों का अधिकतर उपयोग किया जाता था लेकिन खेती में मशीनीकरण शुरू हुआ जिससे बैलों का बहुत कम उपयोग हो गया इसलिए ये व्यापर भी कम हो गया है अब इनको इनका पुश्तैनी धंधा तो करने नहीं दिया जा रहा है और इनको अन्य रोज़गार के साधन उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं. जन सुनवाई में आये प्रकाश बंजारा ने कहा कि आज हमें रोज़गार के विकल्प ढूँढने पड़ रहे हैं आज हम कम्बल, से लेकर छोटी-छोटी चीजें बेचते हैं जिससे अपनी आजीविका चलाते हैं और समाज के कुछ लोग बैल व्यापार का काम करते हैं उन्हें ये असामाजिक तत्व परेशान करते हैं और चौथवसूली करते हैं.

बीपीएल व सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं: बंजारा समुदाय एक घुमंतू समुदाय जो एक जगह बसकर रहता नहीं था लेकिन जब घूमकर जिन्दगी चलाना मुश्किल हो गया तो इन्होने एक जगह पर बसना शुरू किया लेकिन घुमंतू जाति होने की बजह से गाँव के दबंग इनको बसने नहीं देते हैं इसलिए ये लोग बहुत स्थानों पर चारागाह या बिलानाम जमीन पर बसे हुए हैं जिसका ग्राम पंचायतें पट्टा नहीं देते हैं और जहाँ पर आबादी जमीन पर भी बसे हुए हैं वहां पर भी

जन सुनवाई में लिए गए प्रस्ताव: आज हुई जन सुनवाई में निम्न प्रस्ताव लिए गए:-

1.   पशु क्रूरता एवं गौवंश तस्करी में जिन लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किये गए हैं उन सभी को वापस लिया जाये.

2.   सरकार जब पशु मेले लगाती है तो बेचने दिया जाये नहीं तो पशु मेले बंद किये जाएँ

3.   सभी फर्जी गौभक्तों के खिलाफ प्रत्येक मामले में मुकदमें दर्ज किये जाएँ और सख्त कार्रवाई की जाये.

4.   बैल बेचने का धंधा बंद होता जा रहा है इसलिये बंजारों को खेती के लिए जमीन दी जाये.

5.   बैल बेचने व खरीदने की एक व्यवस्था बने जिससे कोई भी फर्जी गौरक्षक चौथवसूली नहीं कर सके

6.   जिन बंजारों के पास अपने मकान के पट्टे नहीं हैं उनको अभी चलाये जा रहे पंचायत शिविरों में पट्टे दिए जाएँ

सरकार से मिला प्रतिनिधिमंडल:  जन सुनवाई के बाद एक बंजारों का प्रतिनिधिमंडल निखिल डे के नेतृत्व में जिला प्रशासन से मिला जिसमें प्रतिनिधिमंडल की ओर से जिला प्रशासन से मांग राखी कि बैलों की खरीद और बेचने के लिए पूरे जिले में एक व्यवस्था बने जिससे बंजारों को बेवजह तंग नहीं किया जाये. जिला प्रशासन की ओर से सभी जिला स्तरीय अधिकारीयों के साथ अतिरिक्त जिला कलक्टर वैरबाजी ने प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों पर जल्द ही उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया.

गौरतलब है कि पंचायत समिति राजसमन्द तथा जिला प्रशासन द्वारा आयोजित किये गए कुंवारिया पशु मेले (ग्राम पंचायत कुंवारिया, पंचायत समिति राजसमन्द में लगाया जाने वाला मेला) से रात्रि को (भारतीय समयनुसार मध्य रात्रि के बाद सुबह के लगभग 1 बजे 4 अक्टूबर 2016 ) 6 बैल बंजारा समुदाय के लोग खरीदकर अपने गाँव ला रहे थे जब यह गाडी गरासिया बंजारों का खेडा (भामखेडा) ग्राम पंचायत पीपली डोडियान पंचायत समिति रेलमगरा जिला राजसमन्द में पहुंची तो बजरंग दल और शिवसेना के गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी करने वालों ने बैलों से भरी हुई गाडो को रोका और बंजारा समुदाय के लोगों से 5 हजार रुपये की मांग की. जब इन लोगों ने पैसा देने से इंकार कर दिया तो इन फर्जी गौ रक्षकों ने सबसे पहले तो जिस गाडी में ये बैल लाये गए थे उसके सभी कांच तोड़ दिए और आगे की हेड लाइट फोड़ दी. उसके बाद में इन समाजकंटकों ने बैल खरीदकर लाये सभी बंजारों को पीटना शुरू किया जिनमें गोरु बंजारा, रायसिंह को इतना पीटा कि उसका तो हाथ ही टूट गया जिसकी हड्डी टूटी है और जगदीश को उन्होंने एक धारदार हथियार जिसे कुंथ कहते से मारा उसके भी चोटें आईं हैं. ये गुंडे इतने पर ही नहीं रुके गोरु बंजारा को गर्दन पर कुंथ रखकर कहा कि कुछ भी बोला तो गर्दन काट डालेंगे और मोटर साइकिल पर पटककर ले गए जिसे रास्ते में आये गाँव भामाखेडा के लोगों ने छुड़वाया. बैलों से भरी गाडी को फुकिया गाँव ले गए, ये सभी लूटपाट व मारपीट बजरंग दल के इकाई अध्यक्ष फुकिया निवासी जगदीश एवं  रतनलाल अहीर व 15 अन्य गुंडों ने की.

जब ये मामला अख़बारों के माध्यम से राज्य और देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुचे तो वहां के लोगों के और बंजारा समुदाय ने इस अत्याचार के खिलाफ उठ खड़े होने और इसका हर संभव विरोध करने का प्राण लिया और इसी क्रम में आज जिला स्तर पर एक जन सुनवाई का आयोजन किया गया. जन सुनवाई में मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल के राष्टीय उपाध्यक्ष राधाकांत सक्सेना, दलित मानवधिकार संगठन दिल्ली से बीना, मजदूर किसान शक्ति संगठन देवडूंगरीभीम से शंकर सिंह और उनके कई साथी, सामाजिक न्याय समिति एवं स्टेट रेस्पोंस ग्रुप से जुड़े गोपाल वर्मा, राकेश शर्मा, प्रसिद्द गायक एवं लोकनाद संस्था से जुड़े विनय महाजन, मध्यप्रदेश घुमंतू, अर्ध घुमंतू बोर्ड के अध्यक्ष नारायण बंजारा, एक्शनऐड से नवीन नारायण, राजसमन्द महिला मंच से शकुंतला पामेचा, आस्था संसथान उदैपुर से आर दी व्यास, आदिवासी विकास मंच कोटडा से धर्मचंद खैर, लाडूराम, पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लक्ष्मण सांखला हनुमानगढ़ से, एक पोटली रेट से राधिका गणेश, समानता शोध संस्थान से नंदिनी डे, सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान से जुड़े मुकेश निर्वासित एवं कमल टांक, अल्लारिप्पू से शिव नयाल, हरमाड़ा की पूर्व सरपंच व राजस्थान मजदूर किसान मोर्चा से जुडी नोरती बाई, सीकर में बंजारों के साथ काम क्र रही रचना आदि विख्यात सामाजिक कार्यकार्त और चिन्तक शामिल हुए.

जन सुनवाई का संचालन सामाजिक कार्यकर्त्ता पारस बंजारा ने किया.

नोट:देश के विभिन्न जनसंगठनों की एक 16 सदस्यीय टीम फैक्ट फाइंडिंग के लिए दिनांक 7 अक्टूबर को भामाखेडा गई और उसने दोनों पक्षों के साथ-साथ पुलिस से भी मिली जिसकी रिपोर्ट संलग्न है

पारस बंजारा, कालू बंजारा

बंजारा समुदाय की ओर से

संपर्क करें 7742846353, 9660554459

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